Friday, October 16, 2015

हंसी और मुस्कराहट

हंसी फूल की तरह होती है,
खिलती है, मुरझा जाती है.
मुस्कराहट खुशबू है,
हंसी को पहचान दे जाती है.


हंसी सूरज की तरह होती है,
तेज़ ही सही, पर ढल जाती है.
मुस्कराहट चाँद है,
रात भर साथ रह जाती है.


हंसी तड़के की तरह है,
लगती है तोह सबको आवाज़ आती है.
मुस्कराहट ज़ायका है,
देर तक ज़बां पे रह जाती है.

हंसी मुसाफिर की तरह होती है,
मंज़िल पर पहुँच कर रुक जाती है.
मुस्कराहट सफर है,
तजुर्बे की तरह याद रह जाती है,