Wednesday, September 23, 2015

ले चल मुझे


बस कहीं ले चल मुझे।
लहर पर उछलते पत्ते की तरह,
हवा में तैरती पतंग की तरह,
बिना मंज़िल के सही,
पर कहीं ले चल मुझे।

सीपी में सोये मोती की तरह,
दिल में दबी ख्वाहिश की तरह,
सबसे छुपा के सही,
पर कहीं ले चल मुझे

बटुए में पड़े स्टैम्प की तरह,
बातों में किये वादों की तरह,
सब भुला के सही,
पर कहीं ले चल मुझे।

चांदनी में रखी शबनम की तरह,
आँखों में रखे आंसू की तरह,
बरस जाने से पहले सही,
बस कहीं ले चल मुझे।

-निशीथ

No comments:

Post a Comment