Thursday, January 27, 2011

ख्वाहिशें भी दाम मांगती हैं.


एक शाम देखा की दिल के बटुए में कुछ पैसे पड़े हैं. सोचा कुछ ख्वाहिशें खरीद लूँ. कुछ पसन्द आयीं तो बटुआ खोला तब जाकर एहसास हुआ की अब तो ख्वाहिशें भी बहुत महंगी हैं.

Tuesday, January 25, 2011

26 जनवरी के plans

ऑफिस की कार पार्किंग में कुछ उडती-उडती बातें सुनी. पास खड़े थे लोग कुछ suit में तो कुछ suit boot में. बोल रहे थे की रात में पार्टी करेंगे, छुट्टी है कल ज्यादा सो लेंगे. सुबह शौपिंग न जाने का जो मलाल था वो 12 से 3 के film के plan से धुल गया. हवा में ताली बजाते हुए बोले,'C u 2morow'. वहीं खड़ा था एक बच्चा जो बेच रहा था कागज़ का तिरंगा इस उम्मीद में की साहब तो खरीद ही लेंगे...

Monday, January 24, 2011

अंगीठी

सुलगते कोयलों के सहारे गुज़रती रात में, लिट्टी-बाटी भून रहे थे. दोस्तों के साथ कुछ नए पुराने गानों की लडियां बुन रहे थे. तभी एक ख्याल आया की बचपन में सर्दियों की हर रात ऐसी ही होती थी और तब हम बड़े होने की जिद्द करते थे. बड़े होकर आज ऐसा क्या पा लिया की इस अंगीठी के पास हम वही बचपन ढूंढ रहे हैं.