एक टुकड़ा ज़िन्दगी
Thursday, January 27, 2011
ख्वाहिशें भी दाम मांगती हैं.
एक शाम देखा की दिल के बटुए में कुछ पैसे पड़े हैं. सोचा कुछ ख्वाहिशें खरीद लूँ. कुछ पसन्द आयीं तो बटुआ खोला तब जाकर एहसास हुआ की अब तो ख्वाहिशें भी बहुत महंगी हैं.
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